कर्णेभिः में मिन्नी मिश्रा जी की लघुकथा
हिन्दी में राइमिंग शब्द खोजें|
लेबल
रविवार, 13 दिसंबर 2020
रविवार, 6 दिसंबर 2020
कर्णेभिः 16- पिघली मोम - महिमा श्रीवास्तव वर्मा-वाचन- ऋता शेखर
साहित्य मधु की प्रस्तुति
कर्णेभिः- लघुकथा वाचन की रविवारीय शृंखला-१६ (०६/१२/२०२०)
लघुकथा- पिघली मोम
लेखिका- महिमा श्रीवास्तव वर्मा
कथा सौजन्य- शारदेय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘काफ़िला’
से
स्वर, समीक्षा व वाचन –ऋता शेखर ‘मधु’
सम्पर्क सूत्र- madhur.sahitya@gmail.com
रविवार, 29 नवंबर 2020
बुधवार, 25 नवंबर 2020
क्षणिकाएँ
क्षणिकाएँ
-------------
१.आँधियाँ चलीं
दो पँखुरी गुलाब की
बिखर गईं टूटकर
मन पूरे गुलाब की जगह
उन पँखुरियों पर
अटका रहा|
2
रेगिस्तान में
आँधियों ने मस्ती की
रेत से भर गई थीं आँखें
आँखों पर
होने चाहिये थे
चश्मे
3
हवा स्थिर थी
जब रौशन किया था
एक दीया
मचल गई ईर्ष्यालु आँधी
और
लौ को हाथों की ओट
दे दिया हमने
--ऋता
रविवार, 22 नवंबर 2020
कर्णेभिः 14 एक आसमान- गिरिजा कुलश्रेष्ठ-वाचन-ऋता शेखर मधु
कर्णेभिः- लघुकथा वाचन की रविवारीय शृंखला-१४ (२२/११/२०२०)
लघुकथा- नया आसमान
लेखिका- गिरिजा कुलश्रेष्ठ
स्वर, समीक्षा व वाचन –ऋता शेखर ‘मधु’
सम्पर्क सूत्र- madhur.sahitya@gmail.com
अभी तक प्रकाशित रचनाएँ-
१४. एक
आसमान-गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी-२२/११/२०
१३.तथास्तु-कंचन
अपराजिता जी१५/११/२०
१२.डर्टी
पिक्चर-प्रियंका गुप्ता जी-८/११/२०
११.घर-शशि पाधा जी- 01/11/20
१०. पहियों वाला घर, आर्तनाद-संतोष सुपेकर जी-25/10/20
९. मौन- त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी- १८/१०/२०
८.गाइड-
कविता भट्ट जी-११/१०/२०२० प्रकाशित
७.कालचिड़ी-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी - 04/10/2020
६.किराया-डॉ कमल चोपड़ा जी- 27/09/20
५. बछड़ू- मृणाल आशुतोष जी- 20/09/20
४. कसक- डॉ आशा सिंह जी- 13/09/20
३.समय - अलका
प्रमोद जी—06/09/2020
२. लड़की-
मिथिलेश दीक्षित जी—30/08/2020
१.महक-निवेदिता
श्री जी -23/08/2020
रविवार, 15 नवंबर 2020
कर्णेभिः 13 तथास्तु- कंचन अपराजिता, स्वर- ऋता शेखर मधु
साहित्य मधु की प्रस्तुति
कर्णेभिः- लघुकथा वाचन की रविवारीय शृंखला-13 (15/11/2020)
लघुकथा- तथास्तु
लेखिका- कंचन
अपराजिता
स्वर, समीक्षा व वाचन –ऋता शेखर ‘मधु’
कथा सौजन्य- लघुकथा के परिंदे
सम्पर्क सूत्र- madhur.sahitya@gmail.com
शनिवार, 7 नवंबर 2020
चार लघुकथाएँ
१.
कब तक
"अरे आभा, इतनी बुझी बुझी क्यों है? अभी सिर्फ महीना भर शादी को हुए हैं। लाइफ एन्जॉय करना चाहिए, पर तेरे चेहरे पर तो।"
"माला, लड़कियां लाइफ एन्जॉय कब और कैसे करें...शादी के पहले माँ ने सास का नाम ले लेकर डराया। ये करो, वो नहीं करो, नहीं तो सास के उलाहने पड़ेंगे।अब बात बेबात सास, माँ का नाम लेती रहती हैं।इन दो माओं के बीच लड़की का अस्तित्व कहाँ है।"
"आभा, तुम्हारी बात तो शत प्रतिशत सही है। आओ, हमलोग प्रण करें कि अपनी बेटियों को सही शिक्षा अच्छे नागरिक बनने के लिए देंगे, न कि किसी के नाम से भय दिखाकर..."
ऋता शेखर 'मधु'
नलिनी ने सुबह की चाय के साथ अखबार भी ले लिया था।अखबार में एक कहानी छपी थी। कहानी का शीर्षक आकर्षक था " एक सागर की आत्महत्या"।
" एक सागर था। अपने आप में मस्त, मीठे जल, शांत लहरों वाला। सागर की विशालता देखते हुए उसमें जाने कितने जीव जंतुओं ने आश्रय लेना शुरू कर दिया। उदारमना सागर सभी का आश्रयदाता बन गया। उतने जीव जंतुओं ने सागर के जलको उद्वेलित करना शुरू कर दिया। एक दिन सागर ने देखा कि एक नन्ही सी सीप उसकी तली में बैठी है। उसने वहाँ पर अपनी लहरों को शांत करके सुरक्षा दी । उसमें एक चमकीले मोती का सृजन हो रहा था। एक दिन सागर शांत भाव से किनारे की चहलकदमी कर रहा था कि सामने से एक नदी आती दिखी। शायद बहुत दूर से आ रही रही। थकी थकी सी। सागर ने अपनी बाहें फैला दीं और नदी उसमें समाहित हो गयी। धीरे धीरे सागर ने महसूस किया कि सृष्टि के इतने सारे जीवों और नदियों को समेट लेने से उसकी जिम्मेदारियाँ बढ़ गयी थीं। उसका जल खारा हो गया था। उसकी लहरों का वेग बढ़ गया था। अब वह शांत नहीं था बल्कि बहुत कुछ कहने को किनारे पर भागता । फिर बिना कहे लौट जाता क्योंकि सब उसके खारेपन को लेकर मजाक बनाते थे। कोई नहीं समझ पाता था कि जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए मीठा रहना मुश्किल था।सबके लिए उसने अपनी आत्मा को मार लिया था। सागर की इस आत्महत्या को समझने वाला ही कौन था।"
नीचे लेखक का नाम पढ़ते ही नलिनी की आँखें फैल गईं। साहिल कब से लिखने लगा। नलिनी के दिल में कसक सी उठी। "ओह! मैंने और बच्चों ने साहिल को खडूस कहकर बहुत मजाक बनाया है। अशक्त माता पिता और दो छोटे भाई बहनों की जिम्मेदारियाँ निभाने में कभी कभी मैं भी स्वार्थी बनकर कठोर हो जाती हूँ। तो क्या साहिल मुझसे मन की बात कहना चाहता है किंतु मैने कभी सुननी ही नहीं चाही। कितना दर्द छुपा है उसके मन में।"
दो दिन पहले आफिस के काम से शहर से बाहर गए पति को फोन लगाने के लिए उसने मोबाइल उठा लिया।
'दादी, मुझे उस बड़े जंगल में जाना है," छोटा मेमना अपनी दादी की गोद में ठुनक रहा था|
" नहीं, वहाँ नहीं जाना| वहाँ बड़ी सी नदी है जिसमें मेमने बह जाते हैं| वह भी तो बह गया था"
"कौन बह गया था दादी, बताओ न"
"तुम्हारा चाचा,वह भी जब नन्हा सा मेमना था पूरे जंगल में अपनी धाक जमाना चाहता था| इसके लिए वह अपना छोटा जंगल छोड़कर बड़े जंगल में चला गया| वहाँ उसे उसके काम की बहुत वाहवाही मिली| तभी उसकी दोस्ती एक लोमड़ी से हो गई| लोमड़ी ने धीरे धीरे मेमने को अपने अधिकार में लेने लगी| मेमना इसे समझ नहीं पाया| अचानक एक दिन उसने देखा कि उसके चारो ओर शेर , चीते, भेड़िए खड़े हैं | वह घबड़ा गया और भागने की तरकीब सोचने लगा| तभी उसने देखा कि लोमड़ी दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी| वह सारी बात समझ गया किंतु तब तक भागने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे|
एक दिन छोटे जंगल में सभी स्तब्ध हो गये थे जब उन्हें खबर मिली कि मेमना नदी में डूब गया," कहते हुए दादी ने लम्बी साँस ली|
"मैं तैरना सीखकर जाऊँगा न, फिर नहीं बहूँगा" मेमना अपनी जिद पर अड़ा था|
"वह भी कुशल तैराक था,"कहकर दादी ने आँखें पोंछ लीं|
=========
नीरज को दोस्ती करना अच्छा लगता था। सिर्फ दोस्ती ही नहीं करता , यदा कदा घर में दोस्तों को बुलाकर पार्टियाँ भी दिया करता।उसकी पत्नी जूही सहर्ष पार्टियों का इंतेज़ाम करती। नीरज का दस वर्षीय बेटा रोहन भी अपने पिता के मित्रों के बच्चों का दोस्त बन गया था।
दोस्तों से घिरा रहने वाले नीरज को कोरोना के कारण घर में कैद रहना जल्द ही अखरने लगा। जब अनलॉक शुरू हुआ तो उसने अपने मित्रों को फिर से बुलाया। सबने कोई न कोई बहाना बनाकर आने से इनकार कर दिया। घर में इसी पर चर्चा छिड़ी हुई थी।
"जूही, मेरा कोई मित्र घर नहीं आना चाहता।"
" तो हम उनके घर चलेंगे पापा। आप उनको बता दो कि आज शाम हम आएँगे।" रोहन बीच में बोल पड़ा।
"ठीक है," कहकर नीरज ने अपने एक मित्र को फोन लगाया।
उस मित्र ने कहा कि वह शाम को व्यस्त है। उसके बाद दो अन्य मित्रों ने भी व्यस्तता का बहाना बना दिया।
"बहुत ही खराब समय चल रहा। किसी को दोष देना फ़िज़ूल है," जूही ने संजीदगी से कहा।
"पापा, आप रजनी बुआ को फोन करो। वे मना नहीं करेंगी।"
नीरज को याद आया कि जाने कितने महीनों, नहीं करीब दो वर्षों से उनकी आपस में बात नहीं हुई थी। रजनी पहले हमेशा फोन करती थी किन्तु नीरज के अन्य कॉल पर व्यस्त होने की सूचना मिलते ही रख देती। इस कॉल की सूचना नीरज को भी मिल जाती थी पर उसने कभी कॉल बैक करना जरूरी नहीं समझा। धीरे धीरे रजनी ने फोन करना बंद कर दिया। कभी कभी जूही फोन से हालचाल ले लिया करती थी|
आज अचानक फोन करने में नीरज को थोड़ी झिझक हुई फिर भी उसने कॉल लगाया। रजनी ने तुरंत फोन उठाया और खुश होकर बातें करने लगी।
" रजनी, रोहन तुम्हें मिस कर रहा। क्या तुम यहाँ आ सकती हो या हमलोग ही तुम्हारे यहाँ आ जायें?"
"अरे वाह! आ जाओ भइया। बड़ा मजा आएगा।इसी बहाने तुमलोगों की सैर भी हो जाएगी।"
नीरज ने फोन रख दिया।
"इस संक्रमण ने दोस्त को दोस्तों से दूर कर दिया , पर रिश्ते नजदीक आ गए," जूही ने मुस्कुराकर कहा और रोहन को लेकर तैयार होने चल दी।
@ऋता शेखर' मधु'
रविवार, 1 नवंबर 2020
कर्णेभिः 11-लघुकथा "घर"- शशि पाधा #ऋता शेखर 'मधु' #लघुकथा #शशि पाधा
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020
नवरात्रि विशेष-पुरस्कार प्राप्त गीत- अम्बिके जगदम्बिके- गीतकार-ऋता शेखर-स्वर- रचना बजाज #ऋत...
*****^*****^****^****^****^****^****^****^****
एकल काव्य-पाठ -एक साहित्यिक मंच द्वारा दस दिवसीय #दशकोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं के आदरणीय त्रिलोको मोहन पुरोहित जी ने परिणाम घोषित किये। फेसबुक समूह का 10 वर्ष पुराना समूह। संभवतः पहला समूह जो रचनाकारों को प्रोत्साहित करने हेतु नगद पुरुस्कार देता रहा है।
प्रथम पुरस्कार-1100 रुपये।
द्वितीय पुरस्कार- 501 रुपये।
तृतीय पुरस्कार- 500 रुपये।
साथ ही प्रमाण/प्रशस्ति पत्र । -
1.#गीत/ग़ज़ल प्रतियोगिता के अंतिम परिणाम -
निर्णायक आदरणीय त्रिलोकी मोहन पुरोहित जी, आदरणीया आदर्शिनी श्रीवास्तव जी, और सुरेन्द्र नवल जी । -
1. लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी
2. ऋता शेखर मधु जी
3. रमा प्रवीर वर्मा जी
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020
कुछ अच्छा भी-लघुकथा
=========
नीरज को दोस्ती करना अच्छा लगता था। सिर्फ दोस्ती ही नहीं करता , यदा कदा घर में दोस्तों को बुलाकर पार्टियाँ भी दिया करता।उसकी पत्नी जूही सहर्ष पार्टियों का इंतेज़ाम करती। नीरज का दस वर्षीय बेटा रोहन भी अपने पिता के मित्रों के बच्चों का दोस्त बन गया था।
दोस्तों से घिरा रहने वाले नीरज को कोरोना के कारण घर में कैद रहना जल्द ही अखरने लगा। जब अनलॉक शुरू हुआ तो उसने अपने मित्रों को फिर से बुलाया। सबने कोई न कोई बहाना बनाकर आने से इनकार कर दिया। घर में इसी पर चर्चा छिड़ी हुई थी।
"जूही, मेरा कोई मित्र घर नहीं आना चाहता।"
" तो हम उनके घर चलेंगे पापा। आप उनको बता दो कि आज शाम हम आएँगे।" रोहन बीच में बोल पड़ा।
"ठीक है," कहकर नीरज ने अपने एक मित्र को फोन लगाया।
उस मित्र ने कहा कि वह शाम को व्यस्त है। उसके बाद दो अन्य मित्रों ने भी व्यस्तता का बहाना बना दिया।
"बहुत ही खराब समय चल रहा। किसी को दोष देना फ़िज़ूल है," जूही ने संजीदगी से कहा।
"पापा, आप रजनी बुआ को फोन करो। वे मना नहीं करेंगी।"
नीरज को याद आया कि जाने कितने महीनों, नहीं करीब दो वर्षों से उनकी आपस में बात नहीं हुई थी। रजनी पहले हमेशा फोन करती थी किन्तु नीरज के अन्य कॉल पर व्यस्त होने की सूचना मिलते ही रख देती। इस कॉल की सूचना नीरज को भी मिल जाती थी पर उसने कभी कॉल बैक करना जरूरी नहीं समझा। धीरे धीरे रजनी ने फोन करना बंद कर दिया। कभी कभी जूही फोन से हालचाल ले लिया करती थी|
आज अचानक फोन करने में नीरज को थोड़ी झिझक हुई फिर भी उसने कॉल लगाया। रजनी ने तुरंत फोन उठाया और खुश होकर बातें करने लगी।
" रजनी, रोहन तुम्हें मिस कर रहा। क्या तुम यहाँ आ सकती हो या हमलोग ही तुम्हारे यहाँ आ जायें?"
"अरे वाह! आ जाओ भइया। बड़ा मजा आएगा।इसी बहाने तुमलोगों की सैर भी हो जाएगी।"
नीरज ने फोन रख दिया।
"इस संक्रमण ने दोस्त को दोस्तों से दूर कर दिया , पर रिश्ते नजदीक आ गए," जूही ने मुस्कुराकर कहा और रोहन को लेकर तैयार होने चल दी।
@ऋता शेखर' मधु'
शनिवार, 10 अक्टूबर 2020
रविवार, 4 अक्टूबर 2020
शनिवार, 26 सितंबर 2020
कर्णेभिः 6-लघुकथा- किराया- डॉ कमल चोपड़ा- वाचन-ऋता शेखर मधु
सोमवार, 21 सितंबर 2020
हिन्दी पखवारा की रचना -3-ताँका
1
माँ सी छुअन
चिड़ियों की चहक
गुलाबों की महक।
2
दीये की जिद
आँधियों से सामना
मद्धिम ज्योति
प्रकाश की कामना
लौ को सहेज रही
3
हरसिंगार
समर्पण की चाह
झरी पँखुरी
भर कर अँजुरी
शिव पूजन चली।
4
चली लेखनी
तलवार से तेज
शब्दों की धार
मोहक अनुस्वार
अनुनासिक चाँद|
५
कृष्ण बिछोह
प्रेम की परिभाषा
मौन राधिका
युग युग बदले
प्रीत नहीं बदली|
--ऋता शेखर 'मधु'
शनिवार, 19 सितंबर 2020
छन्न पकैया
छन्न पकैया छन्न पकैया, बिटिया घर का गहना।
लगती है गुड़िया सी प्यारी, भाई का है कहना।।१
कान्हा जी के आ जाने से, गूँज उठा है सोहर।।२
बुरे काम का सदा रहेगा,जग में बुरा नतीजा।।३
चंचल जिद्दी कोरोना पर, मास्क पड़ा है भारी ।।4
देख पुलिस का मोटा डंडा, चोर निकल के भागा || ५
सब पर भारी पड़ती है, पढ़ती लिखती मुनिया ||६
उसके घट मे भरा है अमृत, घड़ा झूठ का रीता ||७
बोलो कैसे बच पाओगे, किया कभी हो जब 'सिन'||८
चूहों की नगरी इटली में, नीरो फिर से आजा|| ९
आई कंगना के वेश में, फिर झाँसी की रानी ||१०
दादी बचपन जी लेती जब, वह गोदी में सोती ||११
--ऋता शेखर
हिन्दी पखवारा की रचना -1-दो का महत्व
-------------------
दोनों तट गर मिल जायें
नदिया बहेगी कैसे
अगर नहीं हों सुख दुःख
जीवन चलेगा कैसे
ओर छोर के बीच में
धागे का अस्तित्व है
पति पत्नी के मध्य मनु
अटका स्वामित्व है
दिन रात जो चलें न साथ
तिथि नहीं बदलेगी
तर्क वितर्क के बिना कहाँ
नवकली करवट लेगी
होते हैं धरती आकाश
सजीव तभी पलते हैं
पतझर को देख देख
बसन्त बाग में चलते हैं
दिल दिमाग जब साथ हों
भाव झर झर फूटें
रूठ जाए जो एक कभी
घर जाने कितने टूटें
जन्म मृत्यु का तथ्य पहचानें
दो का महत्व तभी हम जानें
-----
हिन्दी अंग्रेजी के बीच में
क्यों अंग्रेजी का वर्चस्व सहें
हिन्दी के अपने सारतत्व हैं
मिलकर हम सब महत्व गहें
हिन्दी बोलें अभिमान से
कलम चलाएँ बड़े शान से
भाषा को मर्यादित रख
खूब रचें अरमान से।
---ऋता
हमारी भाषा हमारा अभिमान
सभी हिन्दी प्रेमियों को हिन्दी पखवारा की हार्दिक शुभकामनाएं!!
रविवार, 23 अगस्त 2020
ड्रैगन को देना है मात
ड्रैगन को देना है मात।
सीमा से है उठी पुकार,
देना अपना सब कुछ वार।
भू भारत का लेगा छीन,
ऐसी सोच न पाले चीन।
बढ़ते पग देंगे हम रोक,
सीमा पर ही देंगे ठोक।
रखकर के नीयत में खोट,
जो भी पहुँचायेगा चोट।
शूरवीर कर देंगे वार,
फिर तो होगी उसकी हार।
हुई मित्रता में जब गैप,
हटा दिए हैं चीनी ऐप।
तोड़ दिए सारे सामान,
देंगे नहीं तुम्हें सम्मान।
दुनिया में है इसकी शान।
प्यार निभाने की है रीत,
मिलन भाव के रचता गीत।
@ऋता शेखे मधु