शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

यह सबकी प्रिय वसुन्धरा है - पृथ्वी दिवस(22 April) पर विशेष




पृथ्वी दिवस

यह सबकी प्रिय वसुन्धरा है
सजाया जहाँ सबने बसेरा है
सुन्दर सुकुसुमित सुवासित
रंगीन सजीली हरी  धरा है
कलकल बहती नदियाँ जहाँ हैं
चहचह करते पक्षी वहाँ हैं
आज सब खतरे में पड़ा है
सब हमारा ही किया धरा है
काट जंगलों को हमने ही
धरती को वीरान किया है
पृथ्वी गर्म तवा बनी है
वायु विषाक्त होने लगा है
गंदगी समेट समेट नदियाँ भी
रुक रुक कर बहने लगी हैं
न हवा शुद्ध न जल है शुद्ध
पर्यावरण हो गया है अवरुद्ध
ईश्वर ने दिया हवा पानी भरपूर
अपनी करनी से हो रहे हम
प्रकृति से प्रतिदिन दूर ही दूर
पृथ्वी ने संजोए हैं
पत्थर भी हरियाली भी
पत्थर का कुछ न बिगड़ेगा
हरियाली रूठ चली जाएगी
पछताने से कुछ न मिलेगा
ज़िन्दगी सिर्फ़ आँसू बहाएगी
एक शपथ लें सब मिल आज
वृक्षारोपण ही हो एकमात्र काज
संरक्षित करें पशु पक्षी और वन
प्रदूषण मुक्त करें नदी और पवन|

ऋता शेखर मधु



15 टिप्‍पणियां:

  1. एक शपथ लें सब मिल आज
    वृक्षारोपण ही हो एकमात्र काज
    संरक्षित करें पशु पक्षी और वन
    प्रदूषण मुक्त करें नदी और पवन|

    ...सार्थक सन्देश देती बहुत सुन्दर रचना..अगर हम प्रकृति से खिलवाड बंद नहीं करेंगे तो प्रकृति हमें कभी माफ नहीं करेगी.

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  2. सन्देश प्रसारक पोस्ट .हम ही तो हैं इस विनाश का कारण।आभार ।

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. एक शपथ लें सब मिल आज
    वृक्षारोपण ही हो एकमात्र काज
    संरक्षित करें पशु पक्षी और वन
    प्रदूषण मुक्त करें नदी और पवन|...मैंने कसम ली

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  5. एक शपथ लें सब मिल आज
    वृक्षारोपण ही हो एकमात्र काज
    mane bhii ksam lii

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  6. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन प्रेरक रचना,...

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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  7. पछताने से कुछ न मिलेगा
    ज़िन्दगी सिर्फ़ आँसू बहाएगी

    सच है .... समय रहते सचेत होना होगा.....

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  8. बहुत सुंदर ऋता जी...........
    चेतना जगाती रचना...............


    सस्नेह.

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  9. बहुत खूबसूरत कविता है दीदी!!

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  10. एक शपथ लें सब मिल आज
    वृक्षारोपण ही हो एकमात्र काज
    संरक्षित करें पशु पक्षी और वन
    प्रदूषण मुक्त करें नदी और पवन| ..


    सार्थक लेखन ... सच्मुश जीवन बचाना है तो ये शपथ सब कों लेनी पढेगी ... लाजवाब सन्देश है इस रचना में ...

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  11. पत्थर का कुछ न बिगड़ेगा
    हरियाली रूठ चली जाएगी
    पछताने से कुछ न मिलेगा
    ज़िन्दगी सिर्फ़ आँसू बहाएगी

    हमें प्रकृति का सम्मान करना ही होगा तभी हमारा अस्तित्व सुरक्षित रह सकेगा।

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  12. कल 05/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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