बारिश की प्रथम बूँद
फोटो-Friends18.com से साभार
घटा छाई घनघोर सखी री
नाचे मन का मोर
बूँद-बूँद बरसा नीर सखी री
तन मन हुआ विभोर
सोंधी खुशबू उड़ी सखी री
मन में उठा हिलोर
भीग गई चूनर सखी री
गीली हुई साड़ी की कोर
पौधे झूमें लहराएँ सखी री
हुआ भँवरों का शोर
खिले सुमन सुंदर सखी री
जी चाहे लूँ बटोर
चाँदनी शीतल हुई सखी री
टक टक तके चकोर
आए किसी की याद सखी री
क्या संध्या क्या भोर
मन हुलसा तन हुलसा सखी री
चले न कोई जोर
बूँद बन गई धारा सखी री
बहे किसी भी ओर
चल बारिश में चल सखी री
भूलें ओर और डोर
आ झूला झूलें सखी री
छू लें गगन का छोर|
ऋता शेखर ‘मधु’
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