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मंगलवार, 4 सितंबर 2012

मेरे शिक्षक




भूल

बात उस समय की है जब मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती थी|
हम तीन छात्राओं के बीच एक-एक अंक को लेकर मारधाड़
मची रहती थी क्योंकि हम तीनों ही प्रथम स्थान पाने के लिए
प्रयत्नशील रहते थे|

फ़ाइनल परीक्षा शुरु हो चुकी थी|उस दिन अंग्रेजी की परीक्षा थी|
मेरे कमरे में मेरे जीवविज्ञान के शिक्षक गार्डिंग कर रहे थे|मेरा
पेपर लगभग पूरा हो चुका था|प्रश्नपत्र में एक शब्द था ऐट औल,
जिस पर वाक्य बनाना था|मुझे उसका अर्थ नहीं पता था|सिर्फ़
पाँच मिनट समय बच गया था|मैं दो अंक का वह वाक्य गँवाने
के लिए तैयार नहीं थी|मैं ने सर से उसका अर्थ पूछा|वे यह बोलते
हुए निकल गए- आई डोन्ट नो इंगलिश ऐट औल|
मैं ने हड़बड़ाहट में ऐट औलशब्द पर ध्यान नहीं दिया|मुझे लगा
कि उन्होंने साफ़ ही मना कर दिया कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती|

जब मैं घर आई तो मेरे पापा ने मुझसे परीक्षा के बारे में पूछा|
मैंने सारी बात बताई|पापा ने वह वाक्य पूछा जो सर ने कहे थे|
उसे सुन वे हँसने लगे और बताया कि सर ने तो मेरी मदद की थी|
मैं ही नहीं समझ पाई थी|मैं अपनी बेवकूफ़ी पर मुस्कुरा उठी|
दो अंक गँवाने की कसक लिए मैं सो गई|

यह बात मुझे किसी की बात को धैर्यपूर्वक सुनने और समझने
की शिक्षा दे गई| मैं आज भी सर को हर शिक्षक दिवस के दिन
आदरपूर्वक याद करती हूँ|
                                    ऋता शेखर मधु