भूल
बात उस समय की है जब मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती थी|
हम तीन छात्राओं के बीच एक-एक अंक को लेकर मारधाड़
मची रहती थी क्योंकि हम तीनों ही प्रथम स्थान पाने के लिए
प्रयत्नशील रहते थे|
फ़ाइनल परीक्षा शुरु हो चुकी थी|उस दिन अंग्रेजी की परीक्षा थी|
मेरे कमरे में मेरे जीवविज्ञान के शिक्षक गार्डिंग कर रहे थे|मेरा
पेपर लगभग पूरा हो चुका था|प्रश्नपत्र में एक शब्द था ‘ऐट औल’,
जिस पर वाक्य बनाना था|मुझे उसका अर्थ नहीं पता था|सिर्फ़
पाँच मिनट समय बच गया था|मैं दो अंक का वह वाक्य गँवाने
के लिए तैयार नहीं थी|मैं ने सर से उसका अर्थ पूछा|वे यह बोलते
हुए निकल गए- ‘आई
डोन्ट नो इंगलिश ऐट औल’|
मैं ने हड़बड़ाहट में ‘ऐट औल’शब्द पर ध्यान नहीं दिया|मुझे लगा
कि उन्होंने साफ़ ही मना कर दिया कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती|
जब मैं घर आई तो मेरे पापा ने मुझसे परीक्षा के बारे में पूछा|
मैंने सारी बात बताई|पापा ने वह वाक्य पूछा जो सर ने कहे थे|
उसे सुन वे हँसने लगे और बताया कि सर ने तो मेरी मदद की थी|
मैं ही नहीं समझ पाई थी|मैं अपनी बेवकूफ़ी पर मुस्कुरा उठी|
दो अंक गँवाने की कसक लिए मैं सो गई|
यह बात मुझे किसी की बात को धैर्यपूर्वक सुनने और समझने
की शिक्षा दे गई| मैं आज भी सर को हर शिक्षक दिवस के दिन
आदरपूर्वक याद करती हूँ|