इन मेघों की हो सावन तुम
इस बगिया की मनभावन तुम
जले रात्रि-मध्य देवालय में
उस दीपक सी हो पावन तुम
चंचल हवा सुहावन तुम
मीरा की वृंदावन तुम
इस रस्ते जो पतित हुए
हो करती उनको पावन तुम
प्राची किरण लुभावन तुम
प्रात: की सजावन तुम
मन जो मेरा डूब गया
उस सोच की हो प्लावन तुम...
...
..
इस बगिया की मनभावन तुम
जले रात्रि-मध्य देवालय में
उस दीपक सी हो पावन तुम
चंचल हवा सुहावन तुम
मीरा की वृंदावन तुम
इस रस्ते जो पतित हुए
हो करती उनको पावन तुम
प्राची किरण लुभावन तुम
प्रात: की सजावन तुम
मन जो मेरा डूब गया
उस सोच की हो प्लावन तुम...
...
..