ईद और उम्मीद जगी रहे
कुछ
तो ऐसा
आह्वान करें
सुनो सुनो ऐ दुनियावालो
हम ईश्वर- अल्लाह के बन्दे
हैं
सब मिलजुल कर रहेंगे जब
देश
हमारा स्वर्ग बनेगा
ना कोई हिन्दु- मुसलमाँ
होगा
सब
इंसान बन जाएँगे|
उसका दुख हमारा होगा
खुशी भी संग मनाएँगे
होली मनाएं दीप जलाएं
ईद में सब गले मिलें
अपना भारत ऐसा हो
जहाँ प्यार- सद्भाव पले
खूबसूरत इक जहाँ बनेगा
कदम से कदम मिलाएंगे|
बाजार एक है एक सामान
सेवई एक और एक मिष्टान्न
रंग बिरंगे कपड़े भी एक
पर्व भले ही अलग अलग हों
खुशियों के हैं रंग समान
उर्दू बोलें या बोलें हिन्दी
हँसते तो हैं एक समान
सब मिल ठहाके लगाएंगे
सब इंसान बन जाएंगे|
ऋता शेखर ‘मधु’