पिता....पिता को याद करने के लिए फ़ादर्स डे की जरूरत नहीं...
स्थिर कदम अडिग विचार
मन निडर मधुर व्यवहार
आज अक्स बन गए पिता के
हृदय में भर लिया धैर्य अपार|
कहा पिता ने 'सच अपनाओ
झूठ को कदमों में झुकाओ'
शान से गर्दन तनी रहेगी
बेधड़क तुम जीते जाओ|
कभी सख्त और कभी नरम
कभी शीत और कभी गरम
काँटों वाले फूल पिता जी
कभी गंभीर तो कभी सुगम|
सहजता सरलता ही रहा
जिनके जीवन का आधार
उनके अमूल्य सिद्धांत अपनाए
जीतने निकले हम संसार|
........ऋता
