| चित्र गूगल से साभार |
स्वावलंबन
आओ मित्रों हम सब सीखें
पाठ स्वावलंबन का
इस पाठ को याद करें हम
तजें भाव परावलंबन का
अपना कार्य जो स्वयं करते
दृढ़ प्रतिज्ञ बन जाते हैं
कोई उनको झुका न पाता
सुख ही सुख वे पाते हैं
‘पराधीन
सपनेहुँ सुख नाहीं’
इसे जो भूल जाते हैं
हर कार्य के लिए वे
दूजे का मुँह जोहते हैं
कोई उनका कार्य न करे
दुखों से वे भर जाते हैं
भागीरथ को याद रखो
गंगा को जिसने लाया है
वीर शिवाजी के दृढ़ निश्चय ने
इतिहास में स्थान बनाया है
झाँसी की रानी को देखो
अंग्रेजों को मार भगाया है
गाँधी के स्वावलम्बी स्वभाव ने
महात्मा उन्हें बनाया है
एक बार अपनाकर देखें
खुशियों से भर जाएँगे
कोई कुछ न बिगाड़ सकेगा
जीवन में सफल हो पाएंगे|