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रविवार, 22 जनवरी 2012

मैं भी चमकूँ

गूगल से साभार

गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई!!!









मैं भी चमकूँ


हम निवासी स्वाधीन देश के
उन्मुक्त विचरण करते हैं
वसुन्धरा के व्योम मंडल में
भास्कर में भारत को देखते हैं
निशा के घने अंधियारे में
नभ के चमकीले चन्द्र में
गाँधी का चेहरा चमकता है
सबसे प्रज्वलित ध्रुवतारे में
देशरत्न सा रतन दमकताहै
अगणित टिमटिम तारों में
बलिदानियों का
रक्तिम मुख भभकता है
रात के खिलते सितारों में
भगतसिंह आजाद मुसकते हैं
लक्ष्मीबाई वीरकुँअर के तारे
आकर्षित बहुत ही करते है
सप्तऋषि-मंडल के तारे
देशभक्त  ही  हैं  सारे
बिस्मिल सुखदेव राजगुरू
नेहरू तिलक पटेल सुभाष
इनसे सजा भारत आकाश
सावरकर और खुदीराम
अम्बर में चमचम करते हैं|

एक अभिलाषा मेरी भी है
देश के लिए मर मिटूँ
जब भी मैं तारा बनूँ
इनके बीच ही मैं भी चमकूँ|

         ऋता शेखर मधु

यह कविता रचनाकार पर १५ अगस्त २०११ को प्रकाशित हुई थी|