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शनिवार, 29 सितंबर 2012

बागवान परेशान


दिगम्बर नासवा जी के ब्लॉग पर ग़ज़ल का सबसे छोटा रूप देखा...वैसा उत्कृष्ट तो नहीं लिख सकती पर कोशिश करने में हर्ज़ क्या है...त्रुटियों के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ|

बागवान
परेशान

बँगला है
आलीशान

भरा हुआ
सामान

बेटी वाले
भाग्यवान

पुत्र निकला
पाषाण

हृदय का
वियाबान

खाली दिमाग
शैतान

मन में नहीं
सम्मान

शरीर चाहे
विश्राम

जान है तो
जहान

वृद्ध का कमरा
सुनसान

उसे जाना है
श्मशान

ऊपर में
भगवान

धरती पर
इंसान

गाएँ अपनी
दास्तान

ऋता शेखर मधु