समेट लेती
टिक टिक ये
घड़ी
कई लम्हों
को
कुछ खुशी के
पल
कुछ
दर्दे-दास्ताँ
यही काल-चक्र
है|
संजो के रखा
किस्से
रामायण के
पति की
प्यारी
पतिव्रता
नारी ही
अग्नि-परीक्षा
देती
यही काल-चक्र
है|
महाभारत
लगा दिया
दाँव पे
नारी-वस्तु
को
पाँच पतियों
वाली
नहीं थी सुरक्षित
यही काल-चक्र
है|
अजातशत्रु
निन्यान्वे
भाइयों को
मौत दे दिया
बौद्ध-धर्म के
पीछे
अहिंसा
अपनाया
यही काल-चक्र
है|
गाँधी हैं गौण
अहिंसा के
देश में
हिंसा है हावी
आतंक के
शिकार
बिलख रहे घर
यही काल-चक्र
है|
धन-अर्जन
धर्म-गुरु
ने किया
सिखाया धर्म
खुद किए
अधर्म
कहीं नहीं विश्वास
यही
काल-चक्र है|
कहते रहे
बेटियाँ
होतीं लक्ष्मी
दुर्गा
सावित्री
पूजते हैं
उनको
पर आने न
देते
यही काल-चक्र
है|
ऋता शेखर ‘मधु’