फागुन के अवसान में, जली होलिका रात
चैत ने खुशी से दिया, होली की सौगात
होली की सौगात, बरसात है रंगों की
जगी हृदय में प्रीत, उल्लासों-उमंगों की
मिल-जुल कर सब आज, फूल खुशियों के लें चुन
वैर-भाव को भूल, मनाएँ चैती-फागुन|
..........................ऋता शेखर ‘मधु’