सेदोका—शीत सुहानी- ऋता शेखर ‘मधु’
१.
शीत सुहानी
जुड़ी प्रीत-रुहानी
कमल पुष्प खिले
श्वेत बालों में
वर्षा वृद्ध हो गई
कहती है कहानी|
२.
नील धवल
स्फटिक-सा आकाश
कुमुदिनी से भरे
ताल-तडाग
नाच उठी चाँदनी
करे अमृत-वर्षा|
३.
शरद-नायिका
मस्त राजहंसी-सी
नव-वधू सी शोभा
झंकृत हुए
उर-वीणा के तार
लगा कास-अंबार|
४.
मन मोहती
पकी धान-बालियाँ
आकुल बन गए
कास-जवास
ढक गई धरती
शुभ्र-श्वेत पुष्पों
से|
५.
शरद पूनो
शीत चन्द्र-हिरण
बरसाए किरण
चावल खीर
बन जाता सात्विक
आरोग्य औ’आत्मिक|
ऋता शेखर 'मधु'
ऋता शेखर 'मधु'