मानस पटल...
मानस पटल की दो बहनें
एक है आशा एक निराशा
साथ साथ वे चलती थीं
बंधन भी था बड़ा अटूट
जीवन का था प्रश्न जटिल
सुलझाने में हुई मुश्किल
दोनों में हो रहा संवाद
हर्ष मिले या मिले अवसाद
आशा आशापरक रही
निराशा मन की बनी कुटिल
एक राह को सीधी रखती
एक उसे कर देती वक्र
उथल पुथल मचता जब मन में
त्वरित गति होती धड़कन में
सही गलत बस मन ही जाने
सीमा भी मन ही पहचाने
आस-निराश दो तट हैं जानो
अश्रु को भाव की धारा मानो
विलय कहाँ होना है इसको
शांत चित से ही तुम ठानो|
............ऋता
