बुजुर्गों ने कहा है...
नेकी कर दरिया में डाल
ठीक है,
बात मानने में हर्ज ही क्या है
की गई नेकियाँ
गहरे पर पैठ गईं
अचानक
दरिया उलीचने की बारी आ गई
क्यों????
कृतघ्नों की लाइन लगी थी...
नेकियाँ देखे बिना
वे मानने वाले नहीं थे***
ऋता शेखर ‘मधु’