बड़े प्यार से सजाया
माली ने छोटा सा चमन
नन्हे छोटे पौध लगाए
सींचा उनको करके जतन
आशा भरी थी नैनों में
कभी खिलेगा इनमें बसंत
बगिया होगी रंगीन हसीन
सपने संजोया माली ने
दूर कहीं से उमड़ घुमड़
आया काला काला बादल
तेज तेज आँधी आई
ओला बरसाया बादल
सह न सका इस विपदा को
उजड़ गया माली का चमन
हाहाकार कर उठा ह्रदय
देख क्षत विक्षत बगिया को
टपक पड़े दो बूँद अश्रु
पीड़ा भरे नयनों से
कैसे संभाले उजड़े चमन को
असहाय इन हाथौं से
बिखर गए थे सारे पौधे
कुछ रौंदे कुछ टूटे से
ममता भरे स्पर्श मिले
उठ खड़ा हुआ माली
थके थके कदमों से उसने
रौंदे टूटे पौधे बटोरे
भले ही पौधे टूट चुके थे
फेंका उनको भारी मन से
आहत दिल से उसने
नव अंकुर क्यारी में रोपे
उग आए कुछ पौधे कटीले
फेंका उसे नहीं माली ने
चुभन झेल बचना सीखा
सींचा उनको भी माली ने
दिन बीते मौसम बीते
अँकुर बढ़ते चले गए
पौध से वे वृक्ष बने
देख देख हर्षाया माली
कैक्टस में भी फूल लगे
बगिया में खिल गया बसंत|
ऋता शेखर ‘मधु