059. सीखा है हमने...(कविता) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
059. सीखा है हमने...(कविता) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 29 मार्च 2012

सीखा है हमने...


                         



नन्हें मुन्नों संग खिलखिलाना सीखा है हमने
उनकी मासूमियत अपनाना सीखा है हमने|१|

मिट गए सारे रंजो-गम पल भर के लिए
उनसे सच्चाई आज़माना सीखा है हमने|२|

अहं को परे रख दिया दोस्ती के लिए
उन-सा ही सब कुछ भुलाना सीखा है हमने|३|

चोट लगी ज़ार ज़ार रो पड़े थे हम
रोते-रोते हँसने की कला भी सीखा है हमने|४|

कागज़ों पर आड़ी सीधी रेखाएँ खींचते हैं वो
उनसे उल्टे सीधे शब्द सजाना सीखा है हमने|५|

भा जाती हैं बच्चों की चुलबुली आँखें
गंभीरता के बीच शरारतें  भी सीखा है हमने|६|

ग़ल्तियाँ हो जाएँ सर झुका लेते हैं वो
उनसे भूल को स्वीकारना सीखा है हमने|७|

घंटी लगी, आजादी का शोर गूँजा
उनके बीच अपना सुर मिलाना सीखा है हमने|८|

ऋता शेखर मधु