199.सूक्ष्म से साकार तक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
199.सूक्ष्म से साकार तक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

सूक्ष्म से साकार तक


सूक्ष्म से साकार तक
आत्मा से परमात्मा तक
मुर्छा से चेतना तक
नई अनुभूतियाँ
कई विसंगतियाँ
सहेजता अंत:करण
कहीं पुष्प की रंगिनियाँ
या कंटकों की है चुभन
कहीं अट्टहास उल्लास है
या अंतस में भरा रुदन
अंतहीन सी राह पर
मंजिल की कोई थाह नहीं
अनवरत चलते रहो
अनवरत जीवन सफ़र
उभर रही संवेदना
लिए हृदय में वेदना
अपेक्षाओं के सिलसिले
शिकवों से भरे दिल मिले
यही काल का चक्र है
कहीं सीधा कहीं वक्र है
प्रेम सीख कर जो चलें
हो जाएँ रस्ते सरल
जीव जन्म का सत्व यही
जीवन का अमरत्व यही|
..........ऋता