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गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

महिला दिवस विशेष १- भारतीय सिनेमा के निर्माण में महिलाओं की भूमिकाएँ

 भारतीय सिनेमा के निर्माण में महिलाओं की पार्श्व भूमिकाएँ – ऋता शेखर ‘मधु’

सिनेमा को सबसे लोकप्रिय कला माध्यम के रूप में देखा जाता है।

एक वक्त था जब भारतीय सिनेमा में महिलाओं को फिल्मों में काम करना या फिर पर्दे पर

महिलाओं का दिखना अच्छा नहीं समझा जाता था लेकिन आज महिलाएं न सिर्फ फिल्मों में किरदार

निभा रही हैं बल्कि फिल्मों में निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखन, गीतकार, संगीतकार का भी काम

कर रही हैं।

इस आलेख में सिनेमा के निर्माण में पर्दे के पीछे से सहयोग देने वाली महिलाओं की चर्चा करेंगे|

१.निर्माता,निर्देशक,पटकथा लेखन २.गीतकार एवं ३.संगीतकार

१. निर्माता, निर्देशक एवं पटकथा लेखक के रूप में महिला

१.फातिमा बेगम

फातिमा बेगम का जन्म 1892 में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था।

फातिमा बेगम पहली महिला फ़िल्म निर्देशक बनीं जिन्होंने रूढ़िवादी विचारों को तोड़कर इस दुनिया में

कदम रखा था और सिनेमा जगत को नया आयाम देने का काम किया। फातिमा बेगम न सिर्फ

भारत की पहली फिल्म निर्देशक हैं बल्कि अपने दौर की प्रसिद्ध अभिनेत्री भी रही हैं। उन्होंने पटकथा

लेखक के तौर पर भी काम किया है।

1926 में पहली बार फातिमा ने ‘बुलबुल-ए-परिस्तान’ नामक फिल्म का निर्देशन किया था और सिनेमा

में निर्देशन करने वाली पहली महिला बनने का भी खिताब जीता। 1926 में इस फ़िल्म का निर्देशन

करने के बाद फातिमा को काफी कुछ झेलना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 1928 में

फिल्म रांझा, 1929 में फिल्म शकुंतला का निर्देशन किया।

२.जोया अख्तर

जोया अख्तर एक भारतीय फिल्म निर्देशक-लेखक हैं। जोया अख्तर बहुत ही कम समय में अपनी

कड़ी मेहनत से बॉलीवुड के सफल निर्देशकों में शुमार हो चुकीं हैं।

जोया का जन्म 14 अक्टूबर 1972 को मुंबई में जावेद अख्तर के घर में हुआ था। जावेद अख्तर

बॉलीवुड के मशहूर लेखक,कवि हैं। इनकी माँ का नाम हनी ईरानी है, जोकि एक बॉलीवुड अभिनेत्री

है।

जोया की पहली निर्देशित फिल्म ‘लक बाय चांस’ थी, जिसे दर्शकों और आलोचकों नें काफी सराहा था।

फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की| ज़ोया को पहचान फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दुबारा’

से मिली। ज़ोया को इस फिल्म के लिए फिल्म फेयर के बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड से भी सम्मानित

किया गया।

उनकी प्रसिद्ध फ़िल्में हैं- दिल धड़कने दो, ज़िंदगी मिलेगी ना दुबारा, लक बाय चांस, बॉम्बे टॉकीज,

तलाश।

३. रीमा कागती

रीमा कागती भारतीय फिल्म निर्देशक और स्क्रीनराइटर हैं। रीमा ने हिंदी सिनेमा में बतौर निर्देशक

फिल्म ‘हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ से डेब्यू किया था।


रीमा कागती का जन्म गुवाहटी, असम में हुआ था। उन्होंने मुंबई स्थित सोफिया कॉलेज से इंग्लिश

लिट्रेचेर में स्नातक की डिग्री हासिल की है। साथ ही उन्होंने सोफिया कॉलेज से ही सोशल

कम्युनिकेशन में परा-स्नातक की डिग्री ली है।

रीमा कागती ने अपने करियर की शुरुआत बतौर सहायक निर्देशक की| इस दौरान उन्होंने हिंदी

सिनेमा के कई दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया, जिसमे फरहान अखतर(दिल चाहता है), आशुतोष

गोविरकर (लगान)हनी इरानी (अरमान), मीरा नायर (वैनिटी फेयर) शामिल हैं।

रीमा ने हिंदी सिनेमा में बतौर फिल्म निर्देशक अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में फिल्म

‘हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड’ से की। इसके बाद रीमा ने फिल्म ‘तलाश’ निर्देशित की| फिल्म

बॉक्स-ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। वर्ष 2016 में रीमा ने फिल्म ‘गोल्ड’ पर काम करना शुरू

किया। जोया अख्तर और रीमा कागती ने मशहूर कॉमिक बुक पर आधारित नई फिल्म 'द आर्चीज' को

भारतीय दर्शकों के हिसाब से बनाया है और पर्यावरण को भी इसमें शामिल किया है। इस फिल्म के

अलावा रीमा कागती ने जोया अख्तर के साथ मिलकर फिल्म रोड ट्रिप पर आधरित फिल्म ;जी ले

जरा; लिखी है।

४. मेघना गुलजार

आज के समय की एक और उल्लेखनीय नाम मेघना गुलजार का है जो फिल्म निर्माता, निर्देशक एवं

पटकथा लेखक हैं| मेघना गुलजार का जन्म 13 दिसम्बर 1973 को मुंबई में हुआ था। वह हिंदी सिनेमा

के मशहूर संगीतकार-गीतकार गुलजार और अभिनेत्री राखी गुलजार की बेटी हैं। उन्होंने हिंदी फिल्म

इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत 1999 में 'हू तू तू'  नाम की फिल्म से की थी। उन्होंने फिल्म के

लिए पटकथा लिखी। इसके बाद कई फिल्मों का निर्देशन किया| 2015 में ;तलवार; और 2018 में

;राज़ी; जैसी फिल्मों से सफलता मिली। ;राज़ी; ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता

और मेघना को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला। मेघना गुलज़ार अपनी फिल्मों के विषय चयन

और भावनात्मक पहलू के लिए जानी जाती हैं। उनकी 2002 की फिल्म ;फिलहाल; में सरोगेसी के बारे

में बात की गई थी जो उस समय काफी साहसिक विकल्प था। फिल्म ;तलवार; से आरुषि तलवार

हत्याकांड को संबोधित किया। ;छपाक; नामक फिल्म पर काम किया जो एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी

अग्रवाल के जीवन पर आधारित एक जीवनी फिल्म है।

पांच साल के लम्बे अंतराल के बाद उन्होंने फिल्म ‘जस्ट मैरिड’ और ‘दस कहानियाँ’ निर्देशित की। दोनों ही फिल्मों ने बॉक्स-ऑफिस पर ठीक-ठाक व्यापार किया था।

५. गौरी शिंदे

गौरी शिंदे आज के समय की एक और प्रमुख फिल्म निर्माता हैं, जो 'जीवन का हिस्सा' फिल्में बनाने

के लिए जानी जाती हैं, जो दर्शकों के दिल में एक संदेश, आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान छोड़

जाती हैं। उन्होंने 2012 में दिल छू लेने वाली फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' से अपनी शुरुआत की, जिसने

व्यावहारिक रूप से सभी पुरस्कार जीते। यह एक महिला द्वारा अपनी असुरक्षाओं पर काबू पाने और

अपनी एक पहचान बनाने के बारे में थी जिसे उसने अपनी माँ को समर्पित किया था। शिंदे की यह

फिल्म आलोचकों दर्शकों सबको बेहद पसंद आई, साथ ही यह फिल्म टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में भी

दिखाई गयी। शिंदे को उनकी इस फिल्म के लिए झोली भर अवार्ड्स भी मिले। उन्हें इस फिल्म के

लिए फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू आवर्ड से भी सम्मानित किया गया| इसके बाद उन्होंने एक और अद्भुत

फिल्म ;डियर जिंदगी; बनाई| इस फिल्म ने करियर-उन्मुख, शहरी महिलाओं द्वारा सामना किए जाने

वाले मुद्दों को संबोधित किया। गौरी शिंदे ने नारीवाद और शहरीवाद के साथ मानसिक स्वास्थ्य और

भावनात्मक मुद्दों को संभाला और एक शानदार फिल्म बनाई जिसे व्यावसायिक और समीक्षकों

द्वारा खूब सराहा गया।

उनकी शार्ट फिल्म ‘ओह मैन’ (2001) को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल के दौरान स्क्रीनिंग के लिए चुनी

गयी थी।

६. मीरा नायर

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली मीरा भारतीय समाज में गहरे तक पैठी हुई खोखली

मान्यताओं पर फिल्म बनाने के लिए जानी जाती हैं. उनकी फिल्में द नेमसेक, मॉनसून वेडिंग और

सलाम बॉम्बे आज भी एक जरूरी फिल्म के तौर पर देखी जाती हैं. उनकी ये फिल्में 'बाफ्टा' और

'गोल्डन ग्लोब' जैसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स के लिए भी नामित हो चुकी हैं.

७. कोंकणा सेन शर्मा

पहले से ही एक शानदार अभिनेत्री और अपनी पसंद से कुछ न कुछ कहने वाली अदाकारा के रूप में

जानी जाने वाली कोंकणा सेन शर्मा ने निर्देशक की भूमिका भी निभा ली है। उन्होंने 2006 में एक

बंगाली फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की और 2017 में हिंदी फिल्म ;ए डेथ इन द गुंज; बनाई। इस

फिल्म को कई अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शित किया गया और सर्वश्रेष्ठ फिल्म के साथ-साथ

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के रूप में कई पुरस्कार जीते।

आगे भी कई नाम हैं जिनमें दीपा मेहता, जद्दन बाई, किरण राव, सई परांजपे, अरुणा राजे, शोभना

समर्थ, माधुरी दीक्षित, दुर्गा खोटे, कल्पना लाजमी, श्रीदेवी, नंदिता दास, दुर्गा खोटे, ज्योति देशपांडे

आदि प्रमुख हैं|

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2] महिला गीतकार


बॉलीवुड की टॉप 10 महिला गीतकारों में 1. कौसर मुनीर 2. अनविता दत्त 3. रानी मल्लिक 4. माया

गोविन्द 5. प्रिया सरिया 6. रश्मी सिंह 7. गरिमा वहल 8. अभिरुचि चाँद 9. सीमा सैनी 10. प्रभा

ठाकुर हैं|

इनके अतिरिक्त अमृता प्रीतम, इंदु जैन, हेमा सरदेसाई, इला अरुण, हार्ड कौर, स्नेहा खानवलकर, पद्मा

सचदेव, श्रुति पाठक को भी बॉलीवुड की गीतकार महिलाओं में गिना जा सकता है। इन सबके के बीच

माया गोविंद का नाम उल्लेखनीय है|

माया गोविंद

बतौर गीतकार माया गोविंद का करियर 1972 में शुरू हुआ । उन्होंने फिल्म ‘आरोप’ के गाने लिखे।

इस फिल्म से उनका गाना ‘नैनों में दर्पण है’ बहुत चर्चित हुआ। यहां से माया का फिल्मों में गाने

लिखने का काम शुरू हुआ। उन्होंने अपने करियर में 350 फिल्मों के लिए 750 से ज़्यादा गाने लिखे।

इसमें ‘आंखों में बसे हो तुम’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ फिल्म का टाइटल ट्रैक, हम तुम्हारे हैं सनम

फिल्म का ‘गले में लाल टाई’, शीशा फिल्म का ‘यार को मैंने मुझे यार ने’ जैसे गाने शामिल हैं। जब

समय के साथ संगीत बदलने लगा तब भी माया ने पॉपुलर सिंगर फाल्गुनी के गाने ‘मैंने पायल है

छनकाई’ के बोल लिखे, जो कि बहुत बड़ा हिट गाना साबित हुआ। आरोप फ़िल्म का गीत, नैनों में

दर्पण है, को लोगों ने बहुत पसंद किया|

दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘महाभारत’ के लिए उन्होंने काफी गीत, दोहे और छंद लिखे।

इसके अलावा ‘विष्णु पुराण’, ‘किस्मत’, ‘द्रौपदी’, ‘आप बीती’ आदि उनके चर्चित धारावाहिक रहे।

सैटेलाइट चैनलों के दौर में भी माया गोविंद के लिखे शीर्षक गीतों की खूब धूम रही।

3] महिला संगीतकार

१. इशरत सुल्ताना

इशरत सुल्ताना का नाम बिब्बो के नाम से प्रसिद्द है। वह भारतीय फिल्म इतिहास में महिला

संगीतकारों की पहली खेप में थीं । उन्होंने भारत की स्वतंन्त्रता से पहले 1934 में फिल्म ;अदल ए

जहांगीर; फिल्म में संगीत दिया था, जोकि बॉलीवुड की प्रसिद्द अभिनेत्री नरगिस की माताजी

जद्दनबाई के भी संगीत देने के एक साल पहले की बात है। इशरत सुल्ताना ने इसके अलावा ;कागज

की लड़की; जोकि 1937 में आई थी। उसके गानों को भी संगीतबद्ध किया था।

२.जद्दनबाई

भारतीय फिल्मों में जद्दनबाई का नाम बहुत ऊँचा है। वह भारत के सिनेमा जगत तकनीकी रूप से

पहली संगीतकार थीं। उन्होंने 1935 में 'तलाशे हक' में संगीत दिया था। उन्होंने संगीत की शिक्षा

कोलकाता के श्रीमंत गणपत राव से ली थी। इसके बाद उन्होंने 1936 में आई फिल्म 'मैडम फैशन' में

न सिर्फ काम किया बल्कि उन्होंने फिल्म के लिए संगीत देने के साथ साथ उसका निर्देशन भी किया।

३. सरस्वती देवी

पारसी परिवार में जन्मी और उन दिनों बॉम्बे टॉकीज़ के कुछ संगीतकारों के साथ काम कर रहीं

सरस्वती बाई ने सबसे पहले अछूत कन्या के लिए ‘ मैं बन की चिड़िया ...’ गाना कम्पोज़ किया था।

४. उषा खन्ना

उषा खन्ना भारतीय फिल्म इंडस्टी की ऐसी महिला संगीकार हैं, जिनके काम को लोग कभी नहीं भूल

सकते। उनके लोकप्रिय गानों में ;छोड़ो कल की बातें;,शायद मेरी शादी का ख्याल;ज़िंदगी प्यार का

गीत है; और ;आप तो ऐसे न थे’ जैसे हिट शामिल हैं। उन्होंने 1940 में पहली बार फिल्म;दिल दे के

देखों; में संगीत दिया था, जिसमें आशा पारेख ने काम किया था और यह उनकी डेब्यू फिल्म थी और

इस फिल्म के कारण वह सुपरहिट हो गयी थी। उन्होंने करीब 40 वर्षों तक सक्रिय तौर पर गाने

बनाये। उषा खन्ना ने हवस, दिल देके देखों, साजन की सहेली और आप तो ऐसे न थे जैसी फिल्मों में

बेहतरीन संगीत दिया।

५. लता मंगेश्कर बनाम आनंद घन

लता जी ने सिर्फ गाने ही नहीं गाये बल्कि फिल्मों में और ख़ासकर मराठी फिल्मों में संगीत

दिया। उन्होंने संगीतकार के रूप में अपना असली नाम न देकर आनंद घन के नाम का

इस्तेमाल किया। लता मगेशकर ने पहली बार सन 1955 में मराठी फिल्म 'राम-राम पाऊंण'

में संगीत दिया था। जिसके बाद उन्होंने 1963 में 'मराठा टिटुका मेळावा', 1963 में 'मोत्यांची

मंजुला', 1965 में 'साधी माणसे' 1969 में उन्होंने 'ताम्बाडी माती' जैसी फिल्मों में भी संगीत

दिया है। उन्हें 1965 में आई फिल्म 'साधी माणसे' के लिए महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें बेस्ट

म्यूजिक डायरेक्टर का सम्मान दिया था। उनका संगीतबद्ध किया एक गाना ‘ऐरणीच्या देवा

तुला...’ बहुत लोकप्रिय भी हुआ है।

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रविवार, 2 जनवरी 2022

प्यार दो---प्यार लो...नव वर्ष पोस्ट



ग्रुप आइकन का चित्रांकन-आराधना मिश्रा


हमारा व्हाट्सऐप पर तीन वर्षों से चल रहा एक समूह है...
नाम है "गाएँ गुनगुनाएँ शौक से"
संस्थापक हैं जानी पहचानी ब्लॉगर अर्चना चावजी
२०२१ के दिसम्बर महीने में मेरा मन हुआ कि सभी गुणवान सुरीली सखियों पर दोहे लिखूँ|
मैं हर दिन एक दोहा लिखती और सबको बूझना होता था कि किसके लिए दोहा लिखा गया| मजे की बात यह कि सारी सखियाँ हर दोहे में फिट बैठती थीं...फिर भी कुछ अलग खासियत सभी में होती...जो व्यक्ति विशेष को खास पहचान देती है| उसी एक गुण के आधार पर समझना होता था| हमने सबके लिए दोहे लिखे...और मुझे भी सबकी ओर से वह अभिव्यक्ति मिली जिसमें मैं सराबोर...सखियों के प्रेम में डूबी रही|

पहले पढ़ें...वह दोहे जो मैंने लिखे|

दोहा1. प्रिय शुचि मिश्रा के लिए
पावन उसका नाम है, है सुन्दर  संस्कार।
चंचल चंचल हैं नयन, जिसपर आये प्यार।।💐💐

दोहा 2. प्रिय रश्मि कुच्छल जी के लिए
मन रमता अध्यात्म में, मन में बसते श्याम।
भोर किरण सी छा गयी, पाकर के पैगाम।।

दोहा 3. प्रिय संध्या शर्मा जी के लिए
जिसके गानों से लगे, कोयल का आभास।
जिसके शब्दों में बँधे, अवनि संग आकाश।

दोहा 4.प्रिय शिखा वार्ष्णेय जी के लिए-
आँखों में सपने भरे, पंखों में विस्तार।
फिर भी है कुछ अनकहा, क्यों वह जाती हार।।

दोहा 5. प्रिय वंदना अवस्थी जी- साधना दी की जोड़ी के लिए-
दोनों एक दूसरे की जानम-जानेमन-
इक दूजे की जान हैं, ऐसा होता भान।
शब्द-सुरों के मेल से, टपके उनका ज्ञान।।

 दोहा 6. प्रिय शोभना चौरे दी-गिरिजा दी के लिए-
साथ साथ हम घूमते, जिनके सारा गाँव।
अनसुने हैं गीत नवल, झूमे सबके पाँव।

दोहा 8. प्रिय संगीता अष्ठाना जी के लिए-
वह सुरीली एक सखी, ब्लॉग समय से खास।।
समझा हमने दर्द को, समझा था अहसास।।

दोहा 7. प्रिय आराधना मिश्रा के लिए-
तन्मयता की सीख में, रहता सदा धमाल।
पाठ-पूजा चाय कड़क, करते मालामाल।।

दोहा 9. प्रिय अर्चना चावजी के लिए
जीवन झंझावात में, धीरज अटल प्रबुद्ध ।
ढल जाते हैं श्लोक में, जाने कितने बुद्ध।।
गढ़ते हैं सबके लिए, सदा नए आयाम।
दो पंक्ति में बँधे नहीं, उनके अनगिन काम ।।

दोहा 10 प्रिय निरुपमा चौहान जी के लिए-
गाएँ या गाएँ नहीं, टिप्पणी मजेदार।
प्यार के संग डांट का , गुण भी अपरम्पार।।

दोहा 11.प्रिय रचना बजाज जी के लिए-
गहरी सी आवाज पर, ठहरे मोहक गीत।
भजन श्लोक शालीनता,खूब निभाये रीत।।

दोहा 12. प्रिय अंजू गुप्ता जी के लिए
लेखन गहरे प्यार का, सदा खोलता पोल।
स्वयं प्यार से हैं भरी, बाँट रहीं दिल खोल।।

दोहा 13. प्रिय पूजा साधवानी जी के लिए-
बोली है या है शहद, हो कैसे पहचान।
संयोजन का गुण बड़ा, कुटुम्बकम  अरमान।।

दोहा 14- प्रिय वंदना अवस्थी दूबे जी के लिए-
फर-फर चलती लेखनी, गजलों की सिरमौर।
लीक पर वह चलें नहीं, हो कोई भी  दौर।।

दोहा 15. प्रिय घुघुती वासुती(शशि जी) जी के लिए-
उमड़ घुमड़ कर मिल रहा, उनका पंछी प्रेम ।
घर से बाहर तक दिखे, उनके सुन्दर नेम।।

दोहा 16. प्रिय प्रियंका गुप्ता जी के लिए-
जापानी गुड़िया लगे, बोली में बिंदास।
 हाइकु या हो लघुकथा, मन में उतरे खास।।

दोहा 17. प्रिय रश्मिप्रभा दी के लिए-
मीलों तक है फैलता, आँचल का विस्तार।
सोख रहा है अश्रु कण, सुनकर करुण पुकार।।
कृष्ण पार्थ की हर व्यथा, लेखन का आधार ।
भाव सरल सद्भाव के , शब्दों के नव हार।।

दोहा 18. प्रिय उषा किरण दी के लिए-
शतदल मुरझाए नहीं, रहता है यह ध्यान।
रूठे जब कोई कभी, लौटता ससम्मान ।।
उत्कृष्ट भाव से सजे, शब्द रहे या रेख।
सरल सहज मुस्कान में, वह सुन्दर आलेख।।

दोहा 19. प्रिय सुनिति बैस जी के लिए-
गुलशन में बादे सबा, गुल पर सुन्दर रंग।
गजलों में वह सज रहे, भाव वज्न के संग।|

दोहा 20. प्रिय मंजुला पाण्डेय जी के लिए-
माहिर उनकी हर विधा, संस्कृत उनकी खास।
काव्यपाठ है कर्णप्रिय, चमक नाम के पास।

दोहा 21. प्रिय इस्मत जी के लिए-
यहाँ दूज का चाँद हैं, गजलों से पहचान।
किस्मत से मिलता रहा, यदा कदा  ही गान ।।

दोहा 22. प्रिय सोनिया जी के लिए-
प्यारा प्यारा गान है, प्यारी सी मुस्कान।
सात समंदर पार से, कर देतीं हैरान।।

दोहा 23. प्रिय शोभना चौरे दी के लिए-
नीम आम सौगान से, है अमीर सा गाँव।
वहाँ वृहद विस्तार में, वह बरगद की छाँव।।
भजन पूजन पाक कला, या हो चंचल गान।
उनके आने से लगे, आया यहाँ विहान।।

दोहा 24. प्रिय गिरिजा कुलश्रेष्ठ दी के लिए- 
उनकी बाल कहानियाँ, जैसे परी उड़ान।
ऐसा खींचे चित्र वह, आ जाती मुस्कान।।
डिप्लोमेटिक वह नहीं, बोलें सच्ची बात।
खुशकिस्मत साहित्य है, पाकर के सौगात ।।

 दोहा 25. प्रिय साधना वैद दी के लिए-
यात्रा उनकी है बड़ी, वियतनाम के देश।
काव्यपाठ या छंद हो, है पूजा परिवेश।।
ऊर्जा की वह स्रोत हैं, हैं समूह की जान।
टास्क में हो गीत सदा, होते यह अरमान।।
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वह स्नेह जो मुझे मिला

मधु सी मीठी वाणी और 
समग्र सुधा सी बरसें
जब जब रचें नव बैन
सिद्धहस्त, मृदुभाषी, 
मन विभोर कर देतीं
हंसते कंवल से नैन
== संगीता अष्ठाना जी
*****************
(1) वेद की ऋचाएं कहूँ तुम्हें या फिर कहूँ कोई राग
पूरित क्रियाकलापों में आपके,, बिखरा हो जैसे पराग

(2) "ऋता शेखर मधु"में समायें 
ऋता सी, शेखर में सम्भाले शिव का सम्पूर्ण
तो मधु में बिखेर मधुरस अपना 
डुबा ले जातीं सबको नशा सा करा साहित्य का
कि खड़े हैं मन्त्र मुग्ध से सभी
मद्य पान कर मधु से बने उन दोहों का
एक तरफ तो मधु से करा रहीं वो शहद का भान
वहीं दूसरी ओर लगता, जैसे किया हो कोई.... मद्यपान
== अंजू गुप्ता जी (तितली)...
********************
अब तक वो करती रही, सखियों का गुणगान!
अब सखियों की बारी है, उनका करें बखान! 
सबका मत बस एक ही है, 
ऋता ( जी) गुणों की खान !! 🥰
== रचना बजाज
*************************
हमारी सर्वगुण सम्पन्न हरफन मौला ऋता जी के प्रति मेरे उदगार । 

ऋता शारदा का तुम्हें, मिला खूब वरदान 
धन्य हुए पाकर तुम्हें ,अद्भुत गुण की खान । 

== साधना वैद 
***********************
रच रच दोहा छन्द नित, सबका किया बखान|
अजब गज़ब यह रूपसी, लगती नन्ही जान ||
नन्ही जान शरीर से मन की शक्ति अपार |
वाणी सा सुन्दर सृजन, नेह कुशल व्यवहार ||
== गिरिजा कुलश्रेष्ठ
*****************************
कविता की कल कल सरिता सी
नित नई लहर ले आती हैं दी 
सूक्ष्म शब्द ,अर्थ विस्तृत हैं लिए आनन्द अपार ,
ऋता लिखूं या ऋचा मैं उनको 
नेह भेंट करें स्वीकार 🙏💐🙂
मैंने दी को कोरोना काल में बराबर पढ़ा कि कितने नियमानुसार,अनुशासित रहकर उन्होंने धीरज से सब संभाला ।
पहले कुछ हायकू लिखे थे मैंने ,सिखाने के लिए ,स्नेहपूर्वक उनमें सुधार के लिए हमेशा उपस्थित रही दीदी ।
== रश्मि कुच्छल
*************************
हर विधा को साध ले, निभाये नियम सब साथ,
सुंदर निपुण निष्ठावान, ये कर्तव्यनिष्ठ अपार।
== शिखा वार्ष्णेय
***************************
धुन की पक्की
--अर्चना चावजी
***************************
अद्भुत हैं अनमोल हैं, गुण भी अपरम्पार ।
इनके हर-इक शब्द में, प्यार भरा उपहार।।
@Rita दी ये दोहा आपके लिए हमारी तरफ से सादर सप्रेम भेंट 😍😘🤗🙏
== संध्या शर्मा 
*************************
हमें दोहे लिखने नहीं आते पर प्रयास किया है ऋता जी के लिए प्यार सहित-
सहज सरल मनभावनी, सभी गुणों की खान।
देखन में छोटी लगें, करतीं बड़े कमाल ।।
== उषा किरण
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शनिवार, 22 अगस्त 2020

आज बधइयाँ बजाओ सखी

Janmashtami 2020: Puja Vidhi Puja Timing Subh Muhurat and Vrat Vidhi

आज बधइयाँ बजाओ सखी,
कान्हा जी घर आये हैं।।
हर्षित हैं वसुदेव देवकी,
मधुसूदन मुस्काये हैं।।

मुदित हुईं यमुना पग छू कर,
गोकुल जाते गोपाला।।
वहाँ मिलेंगी मात यशोदा
प्रभु बनेंगे नन्दलाला।।

तोरण द्वारे लगाओ सखी,
कान्हा जी घर आये हैं।।
दूध बिलोतीं मात जसोदा,
मटकी में दधि भरती हैं||

लगा रहीं काजल का टीका,
बुरी बलाएँ हरती हैं||
फूल बैजंती लाओ सखी,
कान्हा जी घर आए हैं||

पलने में मखमल डलवा दो,
श्याम वहाँ पर झूलेंगे||
नंद सुनेंगे जब किलकारी,
हृदय कुसुम बन फूलेंगे||

मोर का पंख सजाओ सखी,
कान्हा जी घर आये हैं||
नाच रहे हैं गोप- गोपियाँ,
आए दाऊ के भाई||

गोकुल की गलियों में गूँजी
मधुर- मधुर सी शहनाई||
चाँद की लोरी गाओ सखी,
कान्हा जी घर आये हैं||

-ऋता शेखर 'मधु'

शनिवार, 15 अगस्त 2020

#Independence Day 20 #National Anthem #स्वतंत्रता दिवस #जन गण मन


आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई|
झंडा ऊँचा रहे हमारा...विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

रविवार, 21 जून 2020

एकमेव सूर्य...पितृ दिवस...योग दिवस...सूर्य ग्रहण...रविवार


sunday special lord surya puja tips for prosperity
वह सिर्फ एक ही हैं जिनमें सभी दिवस समाहित हो रहे...
सभी दिवसों के लिए एकमेव शुभकामनाएँ 💐💐💐💐💐

आज पितृदिवस है....सूर्य से बड़ा पिता कौन
आज योग दिवस है.... सूर्य नमस्कार से बड़ा योग कौन
आज सूर्यग्रहण है...इसे बड़ी खगोलीय घटना कौन
आज रविवार है...सूर्य भगवान का दिन


पिता के समान ऊर्जादायक सूर्य को बारम्बार नमस्कार है 🙏🙏🙏🙏

सूर्य नमस्कार योग बारह आसनों में पूर्ण होता है|
सभी आसनों के लिए अलग अलग मंत्र हैं, जिसे संकलित किया है|

१.प्रणाम आसन
उच्चारण : ॐ मित्राय नमः
अर्थ: सबके साथ मैत्रीभाव बनाए रखता है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)

२.हस्तउत्थान आसन।
उच्चारण: ॐ रवये नमः।
अर्थ: जो प्रकाशमान और सदा उज्जवलित है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)

३.हस्तपाद आसन
उच्चारण: ॐ सूर्याय नम:।
अर्थ: अंधकार को मिटाने वाला व जो जीवन को गतिशील बनाता है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)

४. अश्व संचालन आसन
उच्चारण: ॐ भानवे नमः।
अर्थ: जो सदैव प्रकाशमान है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)

५.दंडासन
उच्चारण: ॐ खगाय नमः।
अर्थ: वह जो सर्वव्यापी है और आकाश में घूमता रहता है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)

६.अष्टांग नमस्कार
उच्चारण: ॐ पूष्णे नमः।
अर्थ: वह जो पोषण करता है और जीवन में पूर्ति लाता है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)
७.भुजंग आसन
उच्चारण: ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
अर्थ: जिसका स्वर्ण के भांति प्रतिभा / रंग है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)
८.पर्वत आसन
उच्चारण: ॐ मरीचये नमः।
अर्थ: वह जो अनेक किरणों द्वारा प्रकाश देता है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)
९.अश्वसंचालन आसन
उच्चारण: ॐ आदित्याय नम:।
अर्थ: अदिति (जो पूरे ब्रम्हांड की माता है) का पुत्र है|
(संकलन-ऋता शेखर मधु)
१०.हस्तपाद आसन
उच्चारण: ॐ सवित्रे नमः।
अर्थ: जो इस धरती पर जीवन के लिए ज़िम्मेदार है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)
११.हस्तउत्थान आसन
उच्चारण: ॐ अर्काय नमः।
अर्थ: जो प्रशंसा व महिमा के योग्य है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)
१२.ताड़ासन
उच्चारण: ॐ भास्कराय नमः।
अर्थ: जो ज्ञान व ब्रह्माण्ड के प्रकाश को प्रदान करने वाला है।
(संकलन-ऋता शेखर मधु)

बुधवार, 18 सितंबर 2019

मेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है - सोरठे


सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंद

मेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।
हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।

व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।
होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।

कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।
छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।

होता है व्यायाम, मूर्धा तालू कण्ठ का।
लेती क्ष त्र ज्ञ से काम, द्वि एकल जब साथ हुए।।

जब भी लगे हलन्त, व्यंजन स्वर से हो अलग।
जुटकर वर्णों के अंत, नवल वर्ण की नींव रखे।।

अपनी भाषा छोड़, क्यों इत उत दोलन करे।
जनमानस को जोड़, सद्भावों के पथ रचो।।

आत्मसात हो नित्य, वर्तनी शुद्धता से बढ़े।
हिन्दी का साहित्य, नित नए सोपान गढ़े।।

-- ऋता शेखर 'मधु'

रविवार, 12 मई 2019

मातृदिवस

कल माँ पर लिखा...आज एक माँ लिखेगी ।

हम उनके दिलों में रहते हैं
इसको वे कहते नहीं
उनके काम बताते हैं

लेखनी थामी जब हाथों में
वे ब्लॉग बनाकर खड़े रहे
ममा को तुक की कमी न हो
शब्दों के व्यूह में पड़े रहे
shabdvyuh.com

हम उनके दिलों में रहते हैं
इसको वे कहते नहीं
उनके काम बताते हैं

जिसे फ़िजूलखर्च कहते हम
जरूरत उसको बतलाते हैं
थ्री जी से हम खुश थे बन्धु
वे फाइव जी दिलवाते हैं

हम उनके दिलों में रहते हैं
इसको वे कहते नहीं
उनके काम बताते हैं

हम जब देखे चादर अपनी
ट्रेन टिकट कटवा लाए
उनको दिखती सुविधा माँ की
बुकिंग प्लेन में करवाये

हम उनके दिलों में रहते हैं
इसको वे कहते नहीं
उनके काम बताते हैं

देख मायूसी चेहरे पर
घण्टों घण्टों बतियाते हैं
सिर रख करके गोदी में
बच्चे बन हठियाते हैं

हम उनके दिलों में रहते हैं
इसको वे कहते नहीं
उनके काम बताते हैं

तबियत जब जब नासाज़ हुई
रसोई उन्हीं के हाथ हुई
आती बिटिया खाना लेकर
जैसे मेरी माँ साथ हुई

हम उनके दिलों में रहते हैं
इसको वे कहते नहीं
उनके काम बताते हैं

ईश्वर से विनती है इतनी
आशीषों के फूल बिछा देना
आँचल की छाँव रहेगी मेरी
तुम बस धूल हटा देना
उनके सतरंगी सपनों में
सुगन्धित पवन मिला देना
बच्चे माँ के धन दौलत हैं
उनपर रक्षा कवच चढ़ा देना
😍😍😘😘
© ऋता शेखर 'मधु'
#mothersday

मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

अभिनंदन राम का


अभिनंदन राम का

भारत की माटी ढूँढ रही
अपना प्यारा रघुनंदन

भारी भरकम बस्तों में
दुधिया किलकारी खोई
होड़ बढ़ी आगे बढ़ने की
लोरी भी थक कर सोई

महक उठे मन का आँगन
बिखरा दो केसर चंदन

वर्जनाओं की झूठी बेड़ी
ललनाएँ अब तोड़ रहीं
अहिल्या होना मंजूर नहीं
रेख नियति की मोड़ रहीं

विकल हुई मधुबन की बेली
राह तके सिया का वंदन

बदल रहे बोली विचार
आक्षेप बढ़े हैं ज्यादा
हे! धनुर्धारी पुरुषोत्तम
लौटा लाओ अब मर्यादा

श्रीराम जन्म के सोहर में
पुलक उठे हर क्रंदन

हर बालक में राम छुपे हों
हर बाला में सीता
चरण पादुका पूजें भाई
बहनें हों मन प्रीता

नवमी में हम करें राम का
धरती पर अभिनंदन
--ऋता शेखर 'मधु'

धरती को ब्याह रचाने दो

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धरती को ब्याह रचाने दो
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धरती ब्याह रचाती है
पीले पीले अमलतास से
हल्दी रस्म निभाती है
धानी चुनरी में टांक सितारे
गुलमोहर बन जाती है
देखो, धरती ब्याह रचाती है।


आसमान के चाँद सितारे
उसके भाई बन्धु हैं
लहराते आँचल पर निर्मल
बहता जाता सिंधु है
ओढ़ चुनरिया इंद्रधनुष की
देखो, धरती ब्याह रचाती है।

बने पुजारी सप्तऋषि
ऋचाएँ वेद सुनाती हैं
नन्दन कानन में वृक्ष लताएं
झूम झूम लहराती हैं
छुईमुई बन कर सिमटी हुई
देखो, धरती ब्याह रचाती है।

इंसानों ने छीन लिया है
उसकी ठंडी छाया को
खेतों में वह ढूँढ रही
स्वर्ण फसल की काया को
वहाँ खड़े भवनों में धरती
कैसे ब्याह रचाएगी ।

मखमली गलीचे दूर्वा के
धूमिल पड़े सड़कों के नीचे
पवन बसन्ती धुआँ धुआँ है
कलियाँ सूखीं अँखियाँ मीचे
वन्दनवार फिर कहाँ बनेंगे
सुमन-हार कहाँ से लाएगी

इंसानों!
लौटा दो सुषमा उसकी
पृथ्वी को स्वर्ग बनाने दो
हम सब नाचेंगे बन बाराती
धरती को ब्याह रचाने दो।
--ऋता

बुधवार, 24 अक्टूबर 2018

शरद चाँदनी

गीत का प्रयास

मौसम की आवाजाही में
हवा सर्द या हुई गरम

शरद चाँदनी शीतल बगिया
चमक उठे दुधिया कचनार
पुष्पदलों के हिंडोलों पर
झूल रहे नन्हें तुषार
अन्दर बाहर होती साँसें
अहसासों को करें नरम

शांत चित्त स्थिर मन प्याला
श्वेत क्षीर पर अमृत वर्षा
मेवा केसर पिस्ता मिलकर
दुग्ध अन्न का कण कण हर्षा
मुरली की मीठी धुन पर
दौड़ी राधा छोड़ शरम

जित देखें तित कान्हा दिखते
सभी गोपियाँ हुईं मगन
राधे राधे जपते कान्हा
एकाकार हुई प्रेम लगन
महारास की पावन बेला में
सुख की अनुभूति बनी परम

मन के सारे द्वेष मिटाकर
प्रभु में अपना ध्यान लगा
पूर्ण चन्द्र की सुन्दरता में
तन में आभा का ज्ञान सजा
इहलोक की झूठी माया से
स्वयं ही मिट जाएगा भरम

मौसम की आवाजाही में
हवा सर्द या हुई गरम

-ऋता

सोमवार, 12 मार्च 2018

नाज करो कि तुम नारी हो

नाज करो कि तुम नारी हो
नाज करो कि सब पर भारी हो
नाज करो कि तुमसे संसार है
नाज करो कि धुरी के साथ हाशिया भी हो
इतनी संपूर्णता किसे मिलती है


तुम बया हो जो खूबसूरत नीड़ बुनती है
गर आंधियों में बिखर भी गए
तो सम्बल और धैर्य चुनती हो
दुआ तुम्हारी प्रभु भी स्वीकारते
इतनी संपूर्णता किसे मिलती है

तलवों के नीचे की जमीन
शुष्क रूखी कठोर हो
या फिर मखमली शीतल दूब हो
नमी के साथ उर्वर रखती अहसास
इतनी संपूर्णता किसे मिलती है

पहाड़ जैसी अडिग हो
गलत को गलत कहने के लिए
नदी जैसी निर्मल हो
निश्छलता से बहने के लिए
इतनी संपूर्णता किसे मिलती है

एक कर में नवजीवन रखती
दूजा कर सेवा को समर्पित
तीजे कर में ई गैजेट्स संभालती
चौथा कर कलम को अर्पित
इतनी संपूर्णता किसे मिलती है

मधुर स्वरों की मालकिन तुम
हर क्षेत्र तुम्हीं से सज्जित है
आखिर क्यों फिर आधी दुनिया
तुम्हारे जन्म से लज्जित है
इतनी अपूर्णता भी किसे मिलती है

नाज करो कि नारी हो
-ऋता

शनिवार, 10 मार्च 2018

नारी

महिला दिवस विशेष रचना-दोहे
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नारी से ही रीत है, नारी से है प्रीत।
नारी से है सर्जना, नारी सुन्दर गीत।।


एक वृत्त के केंद्र में, नारी का संसार।
प्रेम त्याग के भाव से , देती है आकार।।

रिश्तों को सम्भालती, बन माला की डोर।
नारी से है अर्चना , तुलसी भावविभोर ।।

बस थोड़े सम्मान से, बन जाती है फूल।
कोमल मन की भावना, सह लेती हर शूल।।

मातृ रूप में है दुआ, बहन रूप में प्रीत।
पुत्री रूप अहसास का, पत्नी रूप है मीत।।

नर विस्तारित कीजिये, अपने मन का कूप।
वर्णित है हर वेद में, सरस्वती का स्वरूप।।

नदी पहाड़ धरा गगन, सभी जगह है राज।
खुल कर के अपनाइए , नारी की परवाज़।।

-ऋता शेखर 'मधु'

सोमवार, 16 जनवरी 2017

उत्तरायण हुए भास्कर



उत्तरायण हुए भास्कर
भक्त नहाए गंग
उम्मीदों की डोर से
उड़ा लो आज पतंग

रग रग में जागी है ऊर्जा
शिशिर गया है खिल
एहसासों के गुड़ में लिपटे
सोंधे सोंधे तिल
थक्के थक्के में दही जमे

लिए गुलाबी रंग
किसका माँझा किससे तेज
आसमान में ठनी लड़ाई
इसका पेंच या उसका पेंच
बढ़ी काटने की चतुराई
पोहा खिचड़ी तिलछड़ी में
उमग रही उमंग

मौसम बदला रिश्ते बदले
ग्राह पकड़ता गज के पैर
पलक झपकते किसी बात पर
अपने भी हो जाते गैर
फन काढ़ता लोभ मोह का
सोया हुआ भुजंग

रामखिलावन बुधिया के घर
लेकर जाता कड़क रेवड़ी
सासू माँ बिटिया रानी की
दिखा रही है अजब हेकड़ी
मकर काल में सूर्य भ्रमण
फड़काता है अंग

खरमास का अवसान हो रहा
अब शुभ मुहुर्त आने को है
दिन बढ़ना रातों का घटना
राग फाग का छाने को है
देख थाल में शगुन का कँगन
कम्मो होती दंग

उम्मीदों की डोर से
उड़ा लो आज पतंग

--ऋता शेखर ‘मधु’

गुरुवार, 25 अगस्त 2016

आज मैं...सबका दुलारा कृष्ण हूँ

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आज मैं....

आज मैं
देवकी का दर्द
यशोदा का वात्सल्य
राधिके का प्रेम
रुक्मिणी का खास हूँ

आज मै
वासुदेव की चिंता
नंद का उल्लास
गोपियों का माखनचोर
पनघट का रास हूँ

आज मैं
कंस का संहारक
कालिया का काल
सुदामा का सखा
योगमाया का विश्वास हूँ

आज मैं
द्रौपदी का भ्राता
पार्थ का सारथी
गीता का प्रणेता
युग युग की आस हूँ

आज मैं
सम्पूर्ण ब्रह्मांड लिए
जग का पालनहार
सोलह कलाओं से युक्त
नीला आकाश हूँ

हाँ, मैं सबका प्यारा, दुलारा कृष्ण हूँ|

--ऋता शेखर 'मधु'

रविवार, 14 अगस्त 2016

एक शपथ-स्वतंत्रता दिवस के लिए

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जन कल्याण की लिए मशाल
हम सबको बढ़ते जाना है
जन हित हो जीवन का मकसद
दुनिया में अलख जगाना है

साफ सुलभ रस्तों पर चलकर
बन्धु बान्धव घर को जाएँ
कहीं मिले न कूड़ा कचरा
प्रयत्न सदा यहीं कर आएँ
गली मुहल्ले मह मह महकें
फूलों के बीज लगाना है

जन कल्याण की लिए मशाल
हम सबको बढ़ते जाना है

अंधियारों में पथ रौशन हो
पोल पोल पर बल्ब जले
ठोकर खाकर गिरे न कोई
गढ्ढे सड़कों के भरे मिलें
समवेत प्रयासों से सबको
ऐसा ही नगर बसाना है

जन कल्याण की लिए मशाल
हम सबको बढ़ते जाना है

सड़कों पर नारी निडर रहे
बच्चों को मिल जाये पोषण
अमीर गरीब का भेद मिटे
मजदूरों का हो न शोषण
छोटे छोटे डग भर भर कर
हमे हिमालय पाना है

जन कल्याण की लिए मशाल
हम सबको बढ़ते जाना है
-ऋता शेखर मधु

रविवार, 13 सितंबर 2015

कर लो हिन्दी से मुहब्बत दोस्तो

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कर लो हिन्दी से मुहब्बत दोस्तो
है बड़ी उसमें नज़ाकत दोस्तो

रूह तक में वो समाती जा रही
लफ्ज़ में रखती नफ़ासत दोस्तो

देश में अपने फले फूले सदा
हर ज़ुबाँ की है क़राबत दोस्तो

बोल अपनापन भरा कहती सदा
है यहाँ माँ की इबादत दोस्तो

क्यूँ विदेशी मूल की भाषा रहे?
इसलिए करती बग़ावत दोस्तो

विश्व में इज्जत की है हक़दार वो
कर रही अपनी वकालत दोस्तो

लोरियाँ कविता रुबाई या ग़ज़ल
हर जगह है वो सलामत दोस्तो

वो सहज भाषा मिठासों से भरी
मानते हम ये हकीकत दोस्तो

कंठ तालू मूर्ध जिह्वा ओष्ठ में
वर्ण की है बादशाहत दोस्तो

हिन्द हिन्दुस्तान हिन्दी भाव है
क्यूँ वहाँ है फिर सियासत दोस्तो
|
ऋता शेखर 'मधु'

रविवार, 14 सितंबर 2014

काव्य का है प्यार हिन्दी


हिन्द का श्रृंगार हिन्दी
भाव का है सार हिन्दी

देव की नगरी से आई
ज्ञान का भंडार हिन्दी

लोकगीतों में बसी यह
है मधुर संसार हिन्दी

डाल पातें झूमती सी
गा रहीं मल्हार हिन्दी

छंद गजलों में महकती
काव्य का है प्यार हिन्दी

भाषणों संभाषणों में
मंच का आभार हिन्दी

बोलने की चाहते हैं
क्यों लगे फिर भार हिन्दी

बाँध देती एक सुर में
प्रांत को हर बार हिन्दी

गा रही सरगम बनी यह
है सफल उद्गार हिन्दी

शिल्प को जब गढ़ रही हो
तब लगे कुम्हार हिन्दी

साथ में उर्दू मिले तो
नज़्म का है हार हिन्दी

यह विदेशों में रमी है
सच बड़ी फ़नकार हिन्दी

मान्यता प्रतियोगिता में
कर रही उपकार हिन्दी

जा बसी हर गंध में यह
राज्य का उपहार हिन्दी
मूल संस्कृत में जमा के
है विटप विस्तार हिन्दी

विष्णु ऊँ ब्रम्हा विराजें
ईश का दरबार हिन्दी

लेखनी में जा बसी है
बन रही रसधार हिन्दी

भर रही है बाजुओं में
वीर का हुंकार हिन्दी

राह, माना है कँटीली
चल पड़ी साभार हिन्दी

शादियाँ त्योहार में भी
गूँजती सौ बार हिन्दी

अंग्रेजी जब से घुसी है
कर रही तकरार हिन्दी

जीत हासिल हम करेंगे
है विजय आसार हिन्दी

प्रेमियों की पात है ये
है मधुर इज़हार हिन्दी

शान से बोलें इसे तो
देश का उपहार हिन्दी

पीर इसकी भी सुनो तुम
माँगती अधिकार हिन्दी

अब विमानों में सजी है 
वक्त की रफ़्तार हिन्दी
*ऋता शेखर ‘मधु’*