इक जया तो मिले
इक दया तो मिले
आशियाँ जो बनाए
वो बया तो मिले
जो निगाहें झुकाए
वो हया तो मिले
कहकहे भी लगाए
वो समाँ तो मिले
वो कलम को चलाए
सरस्वती तो मिले
जो टके भी कमाए
वो रमा तो मिले
जो भजन भी सुनाए
वो सुरीली मिले
घर-चमन में सजे
वो सजीली मिले
पाक में हो
निपुण
अन्नपूर्णा
मिले
लोग देखें अपलक
उर्वशी भी मिले
जो स्कुटी
ले उड़े
वो बसंती
मिले
पैंजनी भी
बजाए
वो नुपुर तो
मिले
प्यार पलते जहाँ
वो जिया तो मिले
लिपटी जो
रहे
वो लता तो
मिले
ढूँढती हर
गली
वो पता तो
मिले
हमकदम जो
बने
वो वधू तो
मिले
सर्व गुण संपन्न
वो कहाँ से मिले:)
ऋता शेखर 'मधु'