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शनिवार, 5 मई 2012

जो निगाहें झुकाए वो हया तो मिले




इक जया तो मिले
इक दया तो मिले

आशियाँ जो बनाए 
वो बया तो मिले

जो निगाहें झुकाए
वो हया तो मिले

कहकहे भी लगाए
वो समाँ तो मिले

वो कलम को चलाए
सरस्वती तो मिले

जो टके भी कमाए
वो रमा तो मिले

जो भजन भी सुनाए
वो सुरीली मिले

घर-चमन में सजे
वो सजीली मिले

पाक में हो निपुण
अन्नपूर्णा मिले

लोग देखें अपलक
उर्वशी भी मिले

जो स्कुटी ले उड़े
वो बसंती मिले

पैंजनी भी बजाए
वो नुपुर तो मिले


प्यार पलते जहाँ
वो जिया तो मिले

लिपटी जो रहे
वो लता तो मिले

ढूँढती हर गली
वो पता तो मिले

हमकदम जो बने
वो वधू तो मिले

सर्व गुण संपन्न
वो कहाँ से मिले:)


ऋता शेखर 'मधु'