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गुरुवार, 2 जनवरी 2014

गुलाब...



नए वर्ष की प्रथम पोस्ट के रूप में गुलाब पर आधारित रचना पेश है.....आप सभी का जीवन गुलाब जैसा कोमल हो और गुलाब की खुश्बू जैसे रिश्ते अपनी सुगंध  बिखेरते रहें...शुभकामनाएँ सभी को !!

गुलाब......

खुश्बू संग रंग भी देखो|
जीवन की तरंग भी देखो|
बीच कंटकों के पनप रहा,
गुलाब की उमंग भी देखो|

फूल देते हाथ भी देखो|
दोस्तों का रुआब भी देखो|
किया है स्वीकार जब इसको,
निभाने का ख्वाब भी देखो|

चाचा की लिबास भी देखो|
सुरभित एहसास भी देखो|
गुलाब से कोमल हों बच्चे
जवाहर की आस भी देखो|

पुष्प की मधुर ताजगी भी देखो|
काँटों की नाराजगी भी देखो|
देवताओं के शीश है सोहता,
गुलाब की पाकीज़गी भी देखो|

................ऋता

आ० दिगम्बर नासवा सर...मैं आपकी पोस्ट पढ़ती तो हूँ पर कमेंट नहीं दे पा रही क्योंकि मैं गूगल+ पर नहीं हूँ...यदि आप मेरी इस रचना पर आते हैं तो आपसे निवेदन है कि साधारण वाला कमेंट बॉक्स लगाएँ अपने ब्लॉग पर...साभार !!